समर्पण और श्रद्धा की भावना वाले लोगों व महाकाली क्षेत्र डेवलपमेंट करने के लिए विशेष कर्मठ वॉलिंटियर कार्यकर्ताओं की जरूरत है और हम उनका स्वागत करते हैं।
कहा जाता है समाज सेवा और ईश्वर सेवा के लिए निकाला गया वक्त को पुण्य का काम कहा जाता है।
समस्त सेवा हेतु कार्य इस प्रकार है-
(१) मंदिर का प्रचार-प्रसार -
गांव - गांव की सभाओं में, पंचायतों में, घर घर जाकर, डिजिटल माध्यम से, पत्र लेखन से, आर्टिकल लिखने व आदि।
(२) भक्ति , संगीत,
भजन कीर्तन, पूजा पाठ, महाकाली मंत्र उच्चारण, मंत्रों का जाप, आध्यात्मिक पत्र लेखन, मंदिर में आरती के समय जाना, मंदिर पर भजन- गाने बनाना आदि।
(३) बुजुर्गों को मंदिर ले जाने में मदद करना, जो लोग चल नहीं पाते अगर वह दर्शनों के लिए इच्छुक हैं तब अपने गांव के सेवकों द्वारा उन्हें कुर्सी पर ले जाकर दर्शन कराया जाए।
(४) श्रमदान - साफ सफाई, सौंदर्य करण, रास्तों के पत्थर हटाना, उजड़े रास्ते ठीक करना, धर्मशाला सौंदर्य करण, पानी का बड़ा टैंक साफ करना, रास्तों से कूड़ा करकट पॉलिथीन आदि साफ करना आदि।
(५) वृक्षारोपण - देवदार व अन्य पेड़ लगाना, पौधों के बचाव के लिए जाली लगाना, फूल पौधों में गोबर की खाद - दवाई डालना आदि।
(६) महाकाली मंदिर और क्षेत्र विकास के लिए राजनेताओं एवं बड़े सरकारी अधिकारियों, बिजनेसमैनों से संपर्क करके काम करना आदि।
आप जिस भी फील्ड से जुड़े हैं अपना कीमती समय निकाल कर सेवा हेतु पुण्य कार्य करना चाहते है कृपया संपर्क करें।
वो लोग कमेंट द्वारा संपर्क करें या
मंदिर अध्यक्ष : श्री दीवान सिंह रावत जी से।
लेखक: योग गुरु नरेश सिंह
गांव: तिमला खोली, जिला पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड

