जानिए #नवरात्रि के #व्रत क्यों किए जाते हैं ?
दोस्तों नवरात्रि हिंदुओं का एक #प्रमुख #पर्व है। नवरात्रि शब्द एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है 'नौ रातें'।
इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति / देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवाँ दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है।
नवरात्रि वर्ष में चार बार आता है। #पौष, #चैत्र, #आषाढ,#अश्विन मास में प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है। नवरात्रि के नौ रातों में तीन देवियों - #महालक्ष्मी,
#महासरस्वती या सरस्वती और #महाकाली के नौ स्वरुपों की पूजा होती है।
जिनके नाम और मुख्य स्थान क्रमशः इस प्रकार है -
(अ) नंदा देवी योगमाया (विंध्यवासिनी शक्तिपीठ),
(ब) रक्तदंतिका(सथूर), शाकम्भरी(सहारनपुर शक्तिपीठ),
(से) दुर्गा(काशी),
भीमा(पिंजौर)
(द) भ्रामरी(भ्रमराम्बा शक्तिपीठ)
को नवदुर्गा कहते हैं।
नवरात्रि एक महत्वपूर्ण प्रमुख त्योहार है जिसे पूरे भारत में महान उत्साह के साथ मनाया जाता है।
नवरात्रि की नौ देवियाँ इस प्रकार है :-
(१) #शैलपुत्री - इसका अर्थ- पहाड़ों की पुत्री होता है।
(२) #ब्रह्मचारिणी - इसका अर्थ- ब्रह्मचारीणी।
(३) #चंद्रघंटा - इसका अर्थ- चाँद की तरह चमकने वाली।
(४) #कूष्माण्डा - इसका अर्थ- पूरा जगत उनके पैर में है।
(५) #स्कंदमाता - इसका अर्थ- कार्तिक स्वामी की माता।
(६) #कात्यायनी - इसका अर्थ- कात्यायन आश्रम में जन्मि।
(७) #कालरात्रि - इसका अर्थ- काल का नाश करने वली।
(८) #महागौरी - इसका अर्थ- सफेद रंग वाली मां।
(९) #सिद्धिदात्री - इसका अर्थ- सर्व सिद्धि देने वाली।
श्रीदुर्गा की सुंदर प्रतिमा या चित्र, सिंदूर, केसर, कपूर, धूप,वस्त्र, दर्पण, कंघी, कंगन-चूड़ी, सुगंधित तेल, बंदनवार आम के पत्तों का, पुष्प, दूर्वा, मेंहदी, बिंदी, सुपारी साबुत, हल्दी की गांठ और पिसी हुई हल्दी, पटरा, आसन, चौकी, रोली, मौली, पुष्पहार, बेलपत्र, कमलगट्टा, दीपक, दीपबत्ती, नैवेद्य, मधु, शक्कर, पंचमेवा, जायफल, जावित्री, नारियल, आसन, रेत, मिट्टी, पान, लौंग, इलायची, कलश मिट्टी या पीतल का, हवन सामग्री, पूजन के लिए थाली, श्वेत वस्त्र, दूध, दही, ऋतुफल, सरसों सफेद और पीली, गंगाजल और नवग्रह पूजन के लिए सभी रंग के फूल भी अवश्य रखें।
नवरात्रि पर देवी पूजन और नौ दिन के व्रत का बहुत महत्व माना जाता है। नवरात्र के नौ पावन दिन स्वयं को शुद्ध, पवित्र, साहसी, मानवीय,आध्यात्मिक और मजबूत बनाने की अवधि होती है। त्योहार के दौरान देवी से आशीर्वाद के साथ उनके चरित्र के गुणों को अपने व्यक्तित्व में शामिल करना चाहिए। इससे तपकर कुंदन बनकर निकल पाए तो नवरात्र हमारी आत्मा को तृप्त कर पाने में सफल रहेंगे।
दरअसल नवरात्र ऋतु परिवर्तन के समय पड़ते हैं। ऐसे समय में बीमार होने की संभावना काफी अधिक होती है। लोगों को कई तरह के संक्रामक रोग भी हो जाते हैं। इसलिए नवरात्र के 9 दिन तक व्रत रखने से खानपान भी संतुलित होता है। व्रत से शरीर स्वस्थ बना रहता है।
पाचन तंत्र को सुचारु रूप से चलता है। कब्ज, गैस, अपच आदि की समस्या से निजात मिल जाती है।
व्रत रखने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। आध्यात्मिक शक्ति और ज्ञान बढ़ने के साथ विचारों में भी पवित्रता आती है।
लेखक- योग गुरु नरेश सिंह
गांव- तिमला खोली, जिला पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड।

