आप सभी को विजयादशमी और दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं


सभी को यह जानना भी आवश्यक है कि विजयदशमी या दशहरा क्यों मनाया जाता है ?
भारतीय संस्कृति में दशहरा (विजयदशमी)
एक प्रमुख त्योहार है।
यह त्योहार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है।
*भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था*।
*इसी दिन देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त किया था*।
*शमी वृक्ष की पूजा -
शमी वृक्ष की पूजा दशहरा वाले दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद और रात्रि से पहले का समय ) में की जाती है। कहा जाता है कि पांडवों ने महाभारत के युद्ध के समय अपने अस्त्र-शस्त्र शमी के वृक्ष पर छिपाए थे, जिससे उन्हें युद्ध में विजय मिली। इसलिए इसकी पूजा की जाती है*।
इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है।
इसीलिये इस दशमी को 'विजयादशमी' के नाम से जाना जाता है (दशहरा = दशहोरा = दसवीं तिथि)
ऐसी मान्यता है कि विजयादशमी के विश्वास से जो कार्य आरम्भ किया जाता है उसमें अवश्य ही विजय मिलती है।
प्राचीन काल में राजा लोग इसी दिन से विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे और प्रस्थान से पहले शस्त्र पूजन करते थे इसलिए आज ही के दिन शस्त्र पूजा भी होती है।
इस दिन लोग नया कार्य प्रारम्भ करते हैं, जैसे - नई इन्वेस्टमेंट करना, लेखन का आरम्भ, नया उद्योग आरम्भ, गृह प्रवेश, शादी करना, बीज बोना, पेड़ लगाना, लक्ष्य निर्धारण करना आदि।
वर्तमान समय में विजय का उत्सव मनाने के लिए इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं। रामलीला का आयोजन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है।
दशहरा का पर्व में दस प्रकार के पापों का परित्याग किया जाता है- जैसे-
(१) काम (२) क्रोध (३) लोभ (४) मोह (५) मद *इकट्ठा करना* (६) मत्सर *द्वेष* (७)अहंकार (८)आलस्य (९) हिंसा (१०) चोरी।
मुझे आशा है कि आप लोगों को भी ईश्वर के द्वारा किए गए कार्यों से प्रेरणा मिली होगी।
जय श्री राम 
जय मां भगवती 
लेखक: योग गुरु नरेश सिंह

