दूर पूरब से लेकर उत्तर-पश्चिम के मध्य तक ऊंची-2 हिमाच्छादित पर्वत श्रृंखला चारों ओर बांज,बुरांस,चीड़ के पेड़ों की हरियाली दूर दूर तक पहाडों की तलहटी में बने खेतों और गांवों के सुन्दर दृश्यों के बीच उच्च स्थान पर स्थित मंदिर परिसर में अपने निर्मल स्थान पर विराजमान ढोल-दमाऊ,भंकोर और मंत्रोंच्चारण के साथ विभिन्न क्षेत्रों से आए भक्तों को अपना शुभाशीष देती मां भगवती की प्रतिमूर्ति न्याजा के पवित्र दर्शन होते ही असीम सुख और शांति की जो अनुभूति प्राप्त होती है यही अहसास मानव जीवन के मूल उद्देश्यों में से एक है।
आइये 14-दिसम्बर को माँ भगवती के इस पावन पर्व कालिंका कौथिग में।
हर्षोउल्लास - खुशीऔर उमंग के साथ प्राप्त करें मां भगवती के आशिर्वाद के रूप में सुख-शांति का अनुभव और अग्रसर हो जीवन के अन्य उद्देश्यों हेतु अपने कार्य क्षेत्रों में परिवार हित,समाज हित,देशहित और मानवहित के लिए नए उत्साह और ऊर्जा के साथ।
माँ भगवती की कृपा आप सभी पर बनी रहे आप सभी को अपने अपने कार्य क्षेत्रों में नए आयाम प्राप्त हो।
जय कालिंका माँ
जगमोहन पटवाल
थबड़िया मल्ला

