गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।।
शुभ-प्रभात
तनसाली सैंण-मठखाणी व सराईखेत के मध्य बहती दो धाराओं के पवित्र संगम स्थल पर स्थित कुलान्टेश्वर महादेव मंदिर में आज मां भगवती का पूरे विधि-विधान के साथ पवित्र स्नान होगा साथ ही महादेव और मां भगवती के सानिध्य में यात्रा में सम्मिलित सभी श्रद्धालु भी इस जीवन दायिनी मां गंगा की सहायक धारा में डुबकी लगा कर अपने को कृतार्थ करेंगे।
अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे विकासखंड के अन्तर्गत लगभग सीमान्त क्षेत्र में स्थित कुलान्टेश्वर महादेव मंदिर प्राकृतिक सुन्दरता के बीच स्थित है।
छोटी-छोटी धाराओं से मिलकर यहां से होते हुए बहती मां गंगा की सहायक यह नदी लखरकोट-मंगरोखाल होते हुए पौड़ी जिले के रसिया महादेव(बीरोंखाल) में प्रवेश करती है जहां से इसे खटलगड के नाम से पुकारा जाता है आगे मैठाणाघाट(बांकानगर) होते हुए दुनाव नामक स्थान पर थलीसैंण-बैजरो से आ रही पूर्वी नयार नाम से प्रसिद्ध नदी के साथ खटलगड नदी का मिलन होता है जहां से यह पूर्वी नयार घाटी नाम के साथ आगे ऐतिहासिक और सुन्दर पर्यटन स्थल सतपुली से होते हुए ब्यास मंदिर(बागी गांव)नामक स्थान पर अलकनंदा-भागीरथी के संगम स्थल देवप्रयाग से होते हुए आ रही जन-जन की भावनात्मक आस्था का आधार मां गंगा में समाहित होकर हरिद्वार की ओर प्रवाहित होती है।
जय कालिंका माँ जय शिव शंकर
जगमोहन पटवाल
थबड़िया मल्ला

