उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों से हो रहे कुछ पलायन और कुछ आधुनिकता के कारण
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उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों से हो रहे कुछ पलायन और कुछ आधुनिकता के कारण यहां के रीति रिवाज, संस्कृति ,संस्कार,खेती,पशु पालन,पूजा पद्धति,शादी-ब्याह खान-पान और इनसे संबंधित संसाधनों वस्तुओं और जानकारियों आदि में बहुत बड़ा बदलाव आया है।
प्रतिवर्ष की भांति इस 9नवंबर उत्तराखण्ड स्थापना दिवस के मौके पर भी बहुत से लोगो ने फेसबुक पर विकास से संबंधित सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य,शिक्षा आदि पर अपने विचार व्यक्त किए करने भी चाहिए ये हमारी मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है और इनको पूर्ण करना सरकारों की जिम्मेदारी है।
परंतु उपरोक्त विषयों पर किसी ने चिंता नही जताई ।
बड़ी ही विडंबना है(उनके लिए नही जो मिश्रित या आधुनिक जीवन शैली जी रहे हैं) उनके लिए जिन्हें अपनी संस्कृति,संस्कार, रीति-रिवाजों आदि से बहुत प्यार और लगाव है।
अब तो केवल औपचारिकता पूरी की जा रही है ।
पहले लोग रीति-रिवाजों को निभाने या फिर उनसे संबंधित अधिकतर वस्तुओं के लिए बाजारों पर आधारित नही थे सब कुछ खेती,पशुओं,काश्तकारों आदि बहुत पर निर्भर था।अब जब खेती पशुपालन काश्तकारों जानकारियों आदि का बुरा हाल है और आगे भी इसी प्रकार चलता रहा तो औपचारिकता तो पूर्ण होगी लेकिन दृश्य कुछ ऐसा होगा
पूजा एवं पिण्ड तर्पण हेतु फलाणामूल का शुद्ध दूध,दही
फलाणांजलि का देशी गाय का शुद्ध घी,शहद
फलाणे का जौ-तिल
पंडित जी- जजमान गाय का गोबर कहाँ है
जजमान- पंडित जी गाय का गोबर तो मिला ही नही पूरे गांव में गाय ही नही है।i
पंडित जी-तो शहर से ही ले आते मंडी में मिल जाता है।
पांच कन्या कहाँ है - पलायन के कारण पांच परिवार भी नही है गावों में।
मंगलेर कहाँ है मांगल के लिए -पैन ड्राइव में डाउनलोड है ।
ढोल दमाऊ कहां है - बजाने वाले नही मिले ,प्रोत्साहन और महत्व की कमी।
अरे भाई ये शगुन कंडी किसे बोलते हैं क्या काम आती है कैसे होती है, अरे वो हल्दी तो मिल गई दीदी बाकी के और कौन सी होती है ओखली किसके घर पर है।
सच में हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं हम बहुत सी जानकारियों को भूलते जा रहे हैं और इसका फायदा भविष्य में कोई बूबल नामक विदेशी कंपनी उठाएगी जो हमारी संस्कृति की सारी जानकारी हमें प्रदान करेगी और उसका प्रतीक चिन्ह भी शायद इस आकार का होगा -
तिवरी में बैठा एक वृद्ध बूबु(दादाजी) B आकार में गर्दन झुकाए○○चश्मा,b हुक्का,L छड़ी,और अंत में हाथ जोड़कर बैठा जानकारी लेने वाला e B○~○~bLe (बूबल) ये जो B होगा ये वास्तव में उस कंपनी का बाॅस होगा और हम उत्तराखण्डी होंगे नतमस्तक हाथ जोड़े जो कि अपनी भाषा,संस्कृति रीति-रिवाजों को बचा नही पाए और आवश्यकता पड़ने पर औपचारिकता पूरी करने के लिए इससे जानकारी ले रहे होंगे।
संक्षिप्त विवरण दिया है किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची हो तो क्षमा चाहता हूँ ।
धन्यवाद
जगमोहन पटवाल
थबड़िया मल्ला
बीरोंखाल पौड़ी गढ़वाल

