भारतीय राजनीति,सामाजिक,सांस्कृतिक संस्थाओं,एन.जी.ओ. आदि बहुतों की कीमत कहो या अस्तित्व केवल और केवल गरीब लोगों की वजह से है।
वे लोग जो इनकी शोभा बढ़ा रहे हैं, जिनकी वजह से राजनीति की दुकानें चल रही हैं,सामाजिक,सांस्कृतिक संस्थाओं व एन.जी.ओ के नए-नए पंजीकरण हो रहे हैं।
राजनेता,सरकारों व सामाजिक,सांस्कृतिक संस्थाओं,एन.जी.ओ की कार्यप्रणाली की हकीकत का पता इस समय कोरोना जैसी महामारी के दौरान शहरों में फंसे उन गरीब लोगों की स्थिति से लगाया जा सकता है जो वास्तव में बहुत परेशान है और अपने घरों के लिए लौटना चाहते हैं परन्तु उन तक मदद नही पहुँच पा रही है।
सरकारों द्वारा सही व्यवस्था न होने के कारण बहुत से ऐसे लोग फायदा उठाकर गांवों को आ रहे हैं जिनकी स्थिति सही है जो हजारों रुपये खर्च कर निजी वाहनों से आ रहे हैं। निजी वाहनों में आने पर इनकी गहन जांच भी नही हो पा रही होगी ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है।
इसके उलट वे लोग नही आ पा रहे हैं जो केवल शहरों में रोजगार के लिए गए हैं और अकेले हैं,जो किराये पर रहते हैं,गांव लौटने के लिए इतना खर्च वहन नही कर पा रहे हैं। बहुत से लोगों को यही जानकारी नही है कि पंजीकरण कैसे होगा कुछ लोगों तक तो प्रशासन द्वारा दी जा रही किसी भी प्रकार की जानकारी,सहायता और सुविधाएं भी नही पहुँच पा रही है।
शहरों में बने उत्तराखण्ड के बहुत सी सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों,अध्यक्षों ने कभी भी किसी खुले मंच से उन लोगों को जो वहां छोटा-मोटा रोजगार कर रहे हैं को पहाडों में लौटने,स्वरोजगार करने की प्रेरणा नही दी होगी उनका कभी भी पूर्ण रूप से उत्थान किया हो।
क्योंकि ये नही चाहते हैं कि कोई उनकी जगह ले हम ही हमेशा इनका नेतृत्व करते रहे,इनको इन संस्थाओं को चलाने के लिए ऐसे लोगों की आवश्यकता होती है और साल में एक-दो बार सांस्कृतिक कार्यक्रम करके अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं। प्रत्येक शहरों में ऐसी दो-चार संस्थाएं और लोग हैं जिनके पीछे हजारों की निम्न आय वर्ग के लोगों की भीड़ है,परन्तु समय आने पर ये संस्थाएं कुछ नही कर पाती।
ऐसा ही हाल राजनीति का भी है। यहां भी पीढ़ी दर पीढ़ी वही लोग नेतृत्व कर रहे हैं और करना चाहते हैं।
सरकारों,जनप्रतिनिधियों, को ठोस कदम उठाने होंगे शहरों में फंसे जरूरतमंद लोगों को मदद पहुंचानी होगी वरना आम गरीब आदमी जाग गया तो नेतृत्व परिवर्तन की जो क्षमता इनके पास है उससे सबकी राजनीति की दुकानें,एन.जी.ओ,सांस्कृतिक संस्थाओं के पद,प्रतिष्ठा में बहुत बड़ा बदलाव होगा।
Post by- Jagmohan Patwal
Village- Thabriya Malla

