भगवान प्रत्यक्ष रूप से किसी को या फिर किसी के हाथ में कुछ नही देते
इसके लिए हमें कर्म करने होते हैं,हिंदू धर्म के मंदिरों,आयोजनों की विशेषता है सबको सुख और समृद्धि,अगर किसी मंदिर में दर्शनों के लिए आने वाले भक्तों को असीम सुख और शांति के साथ-साथ उनके द्वारा किसी को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हों,जिससे कि उनके परिवार का पालन-पोषण हो रहा हो, तो यही(दोनों के लिए) सबसे बड़ा दान पुण्य व सुख और समृद्धि है। देवी,देवताओं की शक्ति और प्रत्यक्ष वरदान व आशिर्वाद यही है।
उत्तराखण्ड निर्माण के बाद लगभग 2004 से हमारे क्षेत्र पौड़ी गढ़वाल के बीरोंखाल व अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे की सीमा पर स्थित,प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ भगवती कालिंका के मंदिर व यहां लगने वाला प्रसिद्ध मेला(कौथिग) की खबरें अखबारों में छपती आ रही है।
जैसे-जैसे अखबारों,राज्य स्तर के समाचार चैनलों,शोशल मीडिया आदि के माध्यम से इस मंदिर और यहाँ पर तीन वर्ष के अन्तराल में लगने वाले प्रसिद्ध मेले की खबरें आती गई,वैसे-वैसे यहां माता के दर्शनों हेतु श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई।
दूर दूर से लोग (जिनका स्वास्थ्य उत्तम व समय हो) यहाँ माता के दर्शनों हेतु हर समय आते रहते हैं।
बहुत से श्रद्धालुगण जिनकी अभिलाषा प्राकृतिक सुन्दरता के बीच स्थित इस मंदिर व माता के दर्शनों के लिए होती है परन्तु समय और उत्तम स्वास्थ्य न होने के कारण व सुविधाओं के अभाव में दर्शन नही कर पाते है।
अल्मोड़ा क्षेत्र की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर के निकट पहुँच चुकी सड़क के माध्यम से दर्शन करने में कोई अधिक कठिनाई नहीं है, धार्मिक पर्यटन से इस क्षेत्र के छोटे बाजारों-शराईखेत,खलीढैया का विकास और विस्तार धीरे धीरे हो रहा है व इसका लाभ क्षेत्र के परिवहन व्यवसायियों(टैक्सी,रामनगर से संचालित कुमांऊ आदर्श) को भी मिल रहा है।
परन्तु पौड़ी जिले के बीरोंखाल क्षेत्र की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं को लंबा रास्ता,अधिक समय व धन व्यय करके रसिया महादेव होते हुए मंदिर के निकट पहुंचना पड़ता है,या फिर कठिन परिस्थितियों व घने जंगलों के बीच पैदल चलकर मंदिर तक पहुंचना पड़ता है।
इस क्षेत्र के व्यवसायियों को मंदिर के सीधे सड़क मार्ग से न जुड़े होने के कारण उपरोक्त लाभ नही मिल पाता है।
सरकार अगर बीरोंखाल की ओर से मंदिर के निकट तक सड़क का निर्माण तेजी से करे तो इस क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के रोजगार बढ़ने की संभावनाएं हैं।
बीरोंखाल के बाजार का विकास बहुत तेज़ी से होगा यहां पर छोटे-छोटे सभी सुविधाओं से युक्त होम स्टे,बहुत से अध्ययन केन्द्रों,दूध से संबंधित कार्य,स्थानीय कृषि उत्पादों,परिवहन आदि से रोजगार बढ़ने की बहुत सी संभावनाएं छुपी हैं।
क्षेत्र की जनता को भी इस विषय पर सोचना होगा और इस पर तेजी से कार्य करने के लिए सरकारों से मांग करनी होगी।
जगमोहन पटवाल
थबड़िया मल्ला

