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Harchi Gaini Hamra Riti Riwaj
शीर्षक -:हरची गैनी हमरा रीति रिवाज
हरची गैनी हमरा रीति रिवाज
हरची गैनी हमरा साज बाज
हरची हमरु पौ पयाणु
अब नी रै वा वली बात
हरची गैनी हमरा रीति रिवाज।
कोदु झुंगरु की धाण हरची गैनी
छंचिया कपलु क स्वाद हरची गैनी
खाण म हुवेगे अब रोज दाल भात
हरची गैनी हमरा रीति रिवाज।
तांबा की तौली क स्वाद हरची गैनी
थकुला गिलासों कु खिबड़ाट हरची गैनी
ब्यौ बरती मा डिस्पोजल हुवेगे आज
हरची गैनी हमरा रीति रिवाज।
ढोल दमो की ताल हरची गैनी
मस्कबाज रणसिंगा की टूँकार हरची गैनी
हूँणु च डी जे कु खूब घमघियाट
हरची गैनी हमरा रीति रिवाज।
पैदल जाणा की व बारात हरची गैनी
थडिया चौफलों की वा ताल हरची गैनी
मंगलेर गीतेरों की कख गैनी वा आवाज
हरची गैनी हमरा रीति रिवाज।
धान झुंगरु की वा बोझी हरची गैनी
अरसा स्वालु की वा सुमरियाँण हरची गैनी
चाउमीन पकोड़ी मा नी आणु स्वाद
हरची गैनी हमरा रीति रिवाज
हरची गैनी हमरा रीति रिवाज।
कविता लेखक -: सुरेन्द्र पटवाल
ग्राम तिमलाखोली( बीरोंखाल)

