
देवभूमि उत्तराखण्ड को पौराणिक काल से ही देवी देवताओं का निवास स्थान रहा है! यहाँ की लोक संस्कृति एंव परम्पाराओं के साथ देवी देवताओं से लेकर भूत-प्रेत तक की पूजा धार्मिक अनुष्ठानों के विधि विधान के साथ किया जाता है! धार्मिक अनुष्ठानों मे डौर थकुल, ढोल दमाऊ प्रसिद्ध रूप से वाध्य यंत्रों के मध्यम से देवी देवताओं का अव्हान किया जाता आया है! यही हमारी पौराणिक लोक परम परम्पराओं मे एक है! और यह लोक संस्कृति का एक मुख्य अंग भी माना जाता है! महाकाली मंदिर निर्माण समिति गढ़वाल कुमाऊँ श्रध्दालुओं की आस्था एवं भावनाओं की सदैव ह्रदय से सम्मान करते है! महाकाली मंदिर निर्माण समिति गढ़वाल कुमाऊँ मंदिर प्रांगण कार्य सन् २००५-६ के उपरान्त बहुत गम्भीर है! जैसेकि मंदिर परिसर मे पिछले चार पाँच वर्षो का कार्य नवनीकरण, फुलवाडी, समतलीकरण, भैरव बाबा मंदिर का पुर्ननिर्माण, पूज्य लैली बूबाजी के भव्य द्वार का निर्माण, श्रीकृष्ण राधा मंदिर निर्माण ईत्यादि का निर्माण कार्य पूर्ण किया! एवं आगे के कार्य हेतु पूर्णरूप से वाध्य हैं। जिसमे चौदह गाँव बडियारी भक्तों का पूर्ण योगदान रहा है! और माँ भगवती की कृपा दृष्टि से विकट भविष्य मे अनेकों कार्य को अंजाम देने मे सक्षम् भी हैं! हम अपनी पौराणिक संस्कृति को सम्पूर्ण राज्य, देश में बढ़ावा देने और प्रचार प्रसार हेतु एकमात्र उद्देश्य पर आधारित है! ताकि भविष्य मे आने वाली हमारी पीढी को हमारी पौराणिक संस्कृति को पहचानने मे सहयोग और सहायता मिल सके।
