ध्यान व योग के लाभ और उद्देश्य
मन को केंद्रित करने की किसी भी प्रकार की क्रिया मनो–योग(ध्यान) कहलाती है। लेकिन यदि यह दिमाग में बिना कोई लक्ष्य रखे किया जाए तो इसका कोई लाभ नहीं है। जब आप रेलवे स्टेशन जाते हैं तो क्या टिकट के लिए आपको टिकट अधिकारी को अपना गंतव्य स्थान नहीं बताना पड़ता? आपको कौन से स्टेशन पर उतरना है, क्या वह नहीं बताना पड़ता? लोग अक्सर कहते रहते हैं “ध्यान करो, ध्यान करो।” लेकिन हमें बताओ तो सही कि ध्यान किस पर करें (ध्येय)! ऐसे रिलेटिव ध्यान का क्या उद्देश्य व लाभ होता है? रिलेटिव ध्यान से प्राप्त हुई शांति व आनंद उसी क्षण खत्म हो जाते हैं, जब आपकी सास आपसे कहें कि “तू बेअक्ल है या फिर अगर आपका कोई नुक़सान हो जाए। उसके बाद आघात व सदमे की शुरुआत हो जाती है।” ऐसे रिलेटिव ध्यान से आपका (काम) कार्य कभी पूरा नहीं होगा, यह आपको कभी भी शाश्वत सुख प्रदान नहीं कर सकेगा।
यह रिलेटिव ध्यान तो विनाशी (टेम्परेरी) है और सिर्फ आपकी एकाग्रता की शक्ति को बढ़ाने में ही मदद करता है! दूसरा होता है रियल ध्यान और उसे आप ज्ञानीपुरुष से ही प्राप्त कर सकते हैं, रियल ध्यान आपको अविनाशी शांति (आनंद) देगा

