रसिया महादेव-ललितपुर,बंदरकोट,कोठा,थबड़िया मल्ला,तल्ला,नौलापुर,खेतू,केदारगली-बीरोंखाल
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1-रसिया महादेव-ललितपुर,बंदरकोट,कोठा,थबड़िया मल्ला,तल्ला,नौलापुर,खेतू,केदारगली-बीरोंखाल
2-रसिया महादेव-तकुलसारी,कांडुली,जाखणी-मैठाणाघाट
इन दोनों मोटर मार्गों का निर्माण लगभग एक ही समय से हो रहा है।
जहां रसिया महादेव मैठाणाघाट वाली सड़क का निर्माण बहुत तेजी से हुआ और हो रहा है तथा सड़क दोनों ओर से मुख्य मार्गों से जुड़ चुकी है यह बहुत ही अच्छी बात है सरकारों का सड़क निर्माण के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद व क्षेत्र की जनता को बहुत-बहुत बधाई।
इस मार्ग से जुड़े गांव कम समय व निम्न किराया खर्च करके इसका लाभ लेते हुए सीधे अपने ब्लाॅक बीरोंखाल से जुड़कर दैनिक कार्यों जैसे-बैंकिंग,खरीददारी,विकास योजनाओं से संबंधित कार्यों की जानकारी व सबसे अधिक महत्वपूर्ण क्षेत्र के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल व वहां उपलब्ध सुविधाओं,सरकारों व कर्मचारियों द्वारा बनाई गई राजनीतिक थ्योरी सुगम-दुर्गम,अतिदुर्गम के माध्यम से नियुक्त डाॅक्टरों व अन्य कर्मचारियों की सेवाओं परन्तु(शहरों की अपेक्षा कम विशेषज्ञ डाक्टरों व सुविधाओं) का लाभ ले रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर ललितपुर से लेकर थबड़िया-बीरोंखाल मोटरमार्ग का कार्य प्रगति पर तो है परन्तु बहुत धीमी गति से।
इन क्षेत्रों के लोगों को उपरोक्त सुविधाओं का लाभ लेने के लिए अभी भी पैदल या फिर अधिक धन और समय खर्च करके बहुत कठिनाइयों का सामना करते हुए रसिया महादेव,जाखणी,मैठाणाघाट होते हुए ब्लाॅक मुख्यालय बीरोंखाल जाना पड़ता है व आपात स्थिति में स्वास्थ्य से संबंधित दवाई,इलाज के लिए स्थानीय छोटे-मोटे क्लीनिक,डाॅक्टरों व ललितपुर में स्थित छोटे से सरकारी अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ता है।
सरकार द्वारा शक्तिपीठ घोषित मां भगवती कालिंका मंदिर इसी सड़क क्षेत्र के तिमलाखोली-कोठा गांव के ऊपर पहाड़ पर स्थित है व बहुत बड़े तथा दूर-दूर तक के क्षेत्रों को प्रभावित करने वाला सुन्दर धार्मिक पर्यटन स्थल है। एक ओर सरकारें पर्यटन,धार्मिक पर्यटन व रोजगार बढाने की बात करती है वहीं दूसरी ओर इनके विकास के प्रति गंभीरता से कार्य करती हुई नजर नही आती।
ऐसे में इस मोटरमार्ग के तेजी से विकास के प्रति सरकारों की कार्यप्रणाली व क्षेत्र की जनता के उदासीन,विरक्त रवैये दोनों पर सवाल पैदा करती है।
जनता के मत और जानकारी के अनुसार इस सड़क के धीमी निर्माण गति के प्रमुख कारणों में से एक वन विभाग द्वारा देरी से स्वीकृति देना भी है अगर ऐसा है तो यह समझने वाली बात है कि इतने वर्षों में दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दलों की पूर्ण बहुमत वाली सरकारों में दो विभागों के मध्य विकास से संबंधित कार्यों के लिए संवादहीनता,तत्परता और गंभीरता की कितनी कमी है।
दूसरी ओर इस मोटरमार्ग से जुड़ी जनता का इसके विकास के प्रति उदासीनता भी बहुत ही दुखद है।
सड़क उदघाटन के 14 वर्षों की सामान्य स्थितियों के बावजूद भी अगर सड़क ब्लाॅक मुख्यालय तक नही पहुँच पाई तो, इस समय कोरोना जैसी विश्वव्यापी समस्या जिसने देश व दुनिया की अर्थव्यवस्था को तोड़ कर रख दिया है और विकास से संबंधित सभी कार्यों पर बुरा प्रभाव डाल दिया है।
ऐसे में इस मोटरमार्ग का भी बीरोंखाल तक, रामनगर से पौड़ी जाने वाले मुख्य मार्ग से जुड़ पाना असंभव लग रहा है।
फिर भी जनता की अपेक्षाओं,उम्मीदों पर,अर्थव्यवस्था में सुधार के बाद सरकार इस पर ध्यान देगी और तेजी से इसके निर्माण कार्य को एक ही चरण में पूरा कर एक अच्छी गुणवत्ता वाली सड़क जनता को व दूर दूर से माँ भगवती कालिंका के दर्शनों के लिए आने वाले भक्तों को समर्पित कर,साथ में क्षेत्र के अनेकों लोगों को रोजगार का अवसर प्राप्त करवायेगी।
यह उम्मीद मैं स्वयं भी रखता हूं।
धन्यवाद
जगमोहन पटवाल
थबड़िया मल्ला 

