जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे "कवि"
कविता रचनाकार,गीतकार,लेखक सभी समाज के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं,यह समाज के दर्पण होते हैं।ये सब समाज में चले आ रहे
भलाई,बुराई,कुरीतियों,ईर्ष्या,द्वेष,भक्ति,साधना आदि अनेकों विषयों पर जल के समान अपने स्वच्छ हृदय से दिखाई दे रहे दर्पण रूपी शब्दों के माध्यम से समाज को उसकी वास्तविकता से परिचित करवाते हैं।
1-प्रभु के प्रति भक्ति भावना जगाने,अर्थात् दीन-दुखियों की सेवा से प्रभु के निकट पहुंचने के लिए कवि द्वारा दिखाया गया दर्पण।
2-देश-धर्म की रक्षा के लिए वीर सैनिकों को अपने बाणों के समान तेज धार,वीररस की दर्पण रूपी बौछार।
3-जीवन संघर्ष,परिवार के पालन-पोषण के मध्य अनेकों बार विकट परिस्थितियों में मानसिक दबाव के समय दिखाया गया हास्य रूपी दर्पण,कि यही तो जीवन है इसमें दुख और सुख दोनों का मिश्रण है और इसकी एक ही औषधि है हंसना और हंसाना।
ऐसे ही विभिन्न दर्पणों के माध्यम से समाज को सुधारने,बचाने,हंसाने,जगाने वाले सभी कवियों,लेखकों को प्रणाम।
सभी भक्तों से अनुरोध है कृपया 23-अगस्त को दिन में 12 बजे इस कवि सम्मेलन में अवश्य जुड़ें।
माँ भगवती कालिंका आप सभी को सुख और समृद्धि दें।
जगमोहन पटवाल
थबड़िया मल्ला

