स्वर्ग है देवभूमि उत्तराखंड
उत्तराखंड एकदम स्वर्ग सा दिखता है। हो भी क्यों ना, भगवान ने स्वयं अपने हाथों से जो बनाया है इसे।कुदरत ने यहां चहुंओर अलौकिक सौंदर्य की छटा बिखेरी हुई है। यहां आकर मन को शांति मिलती है ! दुनिया की सबसे सुंदर इमारतें और सुख सुविधाओं से सजे आलीशान घर इस देवभूमि की तुलना में रत्ती भर नहीं हैं।
कहते हैं ऋषि मुनियों ने सैकड़ों साल तपस्या करके इसे दिव्यभूमि बनाया है, जिसका वैभव पाने के लिए श्रद्धालु मीलों की यात्रा करके अपने भगवान के दर्शन को आते हैं।
देवभूमि उत्तराखंड, जिसकी हवा में है गंगा आरती की सुगन्ध और शाम स्वयं में समेटे है ढेर सारी शीतलता। चलिए तपोभूमि उत्तराखंड का एक सफ़र, हमारे साथ।पूरे भारत में देवताओं, देवियों और महान ऋषियों ने जन्म पाया है लेकिन उत्तराखंड को ही देवभूमि कहलाने का गौरव मिला हुआ है। इसके पीछे कई कहानियाँ भी हैं और बहुत सारी सत्यता।देवभूमि उत्तराखंडपूरे भारत की सबसे विशाल और पवित्रत नदियाँ देवभूमि उत्तराखंड से निकलती हैं। गंगा, यमुना और सरस्वती नदी का उद्गम स्थल है उत्तराखंड।भगवान शिव का ससुराल है
उत्तराखंड का दक्ष प्रजापति नगर।पाण्डवों से लेकर कई राजाओं ने तप करने के लिए इस महान भूमि को चुना है। ध्यान लगाने के लिए महात्मा इस जगह को उपयुक्त मानते हैं और आते हैं। कई साधुओं ने यहाँ स्तुति कर सीधा ईश्वर की प्राप्ति की है। पाण्डव अपने अज्ञातवास के समय उत्तराखंड में ही आकर रुके थे।
आइए हमारे उत्तराखंड !
हम सभी को यह भी सुनिश्चित करना है कि हमारी देव भूमि, देव भूमिके रूप में बनी रहे!
जय उत्तराखंड!

