सुगंध मन मस्तिष्क को प्रसन्न करने और एक #औषधीय उपकरण बनाने के लिए धूप बत्ती और अगरबत्ती का उपयोग किया जाता था।
यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही है और धूप अगरबत्ती को #तंत्र ,#मंत्र , #पूजा , #पाठ व अन्य धार्मिक #अनुष्ठानों में विशेष रुप से इस्तेमाल किया जाता है।
धूप अगरबत्ती जलाने के #फायदे:
(१) धूप अगरबत्ती जलाने से ईश्वर का #ध्यान होता है।
(३) सकारात्मक #ऊर्जा मिलती है।
(४) वातावरण #शुद्ध होता है, क्योंकि फैले हुए बैक्टीरिया, कीट पतंग सभी दूर भाग जाते हैं।
(५) सुगंध से मन - मस्तिष्क #प्रसन्न हो जाता है।
(६) नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
(७) घर का वास्तु #दोष दूर होते हैं।
(८) #तनाव मुक्ति होती है आदि।
धूप देने के तरीके :
हिंदू धर्म में धूप, अगरबत्ती, दीप जलाने और हवन करने का बहुत ज्यादा महत्व है।
(१) सामान्य तौर पर धूप दो तरह से ही दी जाती है। पहला गुग्गुल-कपूर से और दूसरा गुड़-घी मिलाकर जलते कंडे या अंगारों पर उसे रखा जाता है। फिर दूर-दूर तक सुगंध फैलती है।
(२) #देवभूमि उत्तराखंड में #देवी #देवताओं और #पितरों को प्रसन्न करने के लिए कुणज ( कुणजू )की पत्तियों और घी को आग के अंगारों पर डालकर धूप दिया जाता है जिससे चारों तरफ विशेष प्रकार की सुगंध फैलती है।
यह एक विशेष प्रकार का हर्बल धूप है। जिसका कोई नुकसान नहीं है।
(३) वर्तमान समय में बाजारों में भी धूप, अगरबत्ती, कपूर व हवन सामग्री के विभिन्न फ्लेवर आ रहे है और उनका ज्यादा इस्तेमाल हो रहा हैं।
सावधानियां: धूप ,अगरबत्ती , दीप व हवन करते समय कुछ सावधानियां बरतनी भी जरूरी है जैसे -
(१) खुले कमरे में ही धूप, अगरबत्ती जलाएं, क्योंकि दरवाजे , खिड़कियों से धुआं और सारी नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाती है और सुगंधित ताजी हवा फैल जाती है।
(२) सूती के कपड़े पहन कर पूजा पाठ करें, इससे आग का खतरा नहीं रहता।
(३) पेट्रोल , मिट्टी का तेल सैनिटाइजर जैसी चीजों को दूर रखें।
(४) अगरबत्ती का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए या ना करें क्योंकि इसके अंदर बांस की लकड़ी लगी होती है और हिंदू धर्म में बांस जलाना अनुचित माना गया है।
धन्यवाद!
जय महाकाली

लेखक: योग गुरु नरेश सिंह
गांव: तिमला खोली, जिला - पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड।

